भारतीय किसान निबंध  | भारतीय किसान का महत्व | किसान पर निबंध हिंदी में | भारतीय किसान पर निबंध हिंदी में  | Essay on Indian Farmer in Hindi

भारतीय किसान

भारतीय किसान निबंध wificlass

भारतीय किसान ब्रह्मा का अवतार है। ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण करते हैं और किसान ब्रह्मा की बनाई मानवमूर्ति का पेट भरता है। संसार का समस्त वैभव ऊँचे-ऊँचे वैभवशाली भवन, आमोद-प्रमोद और मनोरंजन के साधन सब किसान के बलिष्ट कंधों पर आश्रित हैं। आकाश में उड़ने वाले पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाले मानव और यहाँ तक कि जल में निवास करने वाले जीव भी किसान पर ही आश्रित हैं। तपस्या भरे जीवन, अभिमान रहित, उदारता और परोपकारी जीवन का जीता-जागता नमूना है भारतीय किसान। यह स्वयं भूखा रहता है ताकि सभी सुखी रहें। यह स्वयं नंगे बदन रहता है और दूसरों के तन को ढकता है ।

भारतीय किसान एक ऐसा वीर त्यागी संन्यासी है जिसे न मान पर हर्ष है और न अपमान का खेद। फटे वस्त्र पहनने का उसे कोई दुःख नहीं । वह ऐसा साधक है जिसे सिद्धि की कामना नहीं । वह ऐसा कर्मयोगी है जिसे फल की इच्छा नहीं । वह तो बस कर्म करने में तल्लीन रहता है। उसका अपना अलग ही छोटा-सा संसार है और वह उसी में मग्न रहता है। जब सारा संसार सुख की नींद ले रहा होता है, तब वह अपने हल-बैल लेकर नंगे पाँव, नंगे सिर खेत की ओर चल देता है। कड़कड़ाते जाड़ों की भयानक रात, शरीर को चीर कर निकल जाने वाली हवा, चारों ओर घना अंधकार, जंगली जानवरों के चिल्लाने की आवाजें, परन्तु उसे भय कहाँ ? जब लोग सोते हुए चैन की बंसी बजा रहे होते हैं, तब वह संसार की चिन्ता में मग्न होता है। खेत में पानी में पैर डाले पौधों को सिंचता दिखाई देता है। जब गर्म हवा के झोंको से शरीर झुलसता है। लोग घरों में कूलर की शीतल वायु का आनंद ले रहे होते हैं तब वह नंगे पाँव झुलसा देने वाली गर्मी में शरीर पर धोती लपेटे अपने खेत में हल चलाता दिखाई देता है।

उमड़-घुमड़कर आते बादलों को देखकर उसके चेहरे पर संतोष की झलक देखने को मिलती है। जब गाँव की गलियों में घुटनों तक पानी भर जाता है, तब किसान अपने खेतों की ओर दौड़ता है, कहीं खेतों में अधिक पानी तो नहीं भर गया, उसका जीवन एक तपस्या है। सूर्य की लालिमा दिखाई देने से पूर्व ही वह उठ जाता है।

पशुधन ही उसका सच्चा धन है। वह उन्हीं की सेवा में लगा रहता है। प्रातः उठकर उन्हें खिलाता-पिलाता है, नहलाता-धुलाता है और फिर अपने हाथों से अपनी प्यारी गाय का दूध निकालता है। इस पशु धन की सेवा ही मानों उसकी तपस्या है, उसकी पूजा है, अराधना है। बाजरे की दो मोटी रोटी लस्सी के साथ पेट में डाली और चल पड़ता है अपने खेतों की ओर। यही रीति है, यही धर्म है उसका । प्रातः से सायं तक खेतों पर रहता है। हल चलाता है, थक जाता है तो पेड़ की नीचे जमीन पर सो जाता है। धरती ही उसका बिस्तर है।

भारतीय किसान ने बड़े कष्ट सहे हैं। अंग्रेजी शासनकाल में भारतीय किसान का अत्यधिक शोषण हुआ। श्रम किया किसान ने और फल चखा जमींदारों ने विदेशी शासकों ने अपने स्वार्थ के लिए नकदी फसलों को प्रोत्साहन दिया उन्होंने भारतीय किसानों पर अनेक अत्याचार किए। भूमि पर स्थाई सुधार का प्रश्न पैदा ही नहीं हुआ और भारतीय किसान खेतीहर मजदूर बनकर रह गए। भारतीय सामाजिक व्यवस्था ने उन्हें निर्धन, शोषित और मजदूर बना दिया। आज का बंधुवा मजदूर उसी व्यवस्था का परिणाम है।

अन्य देशों के किसान आज सुखी व सम्पन्न हैं। बड़े-बड़े फार्मों की व्यवस्था है, मशीनीकृत कृषि ने उनके श्रम और समय की बचत की है। कृषि की नई तकनीकों का उन्हें ज्ञान है। उन्नत किस्म के कृषि यन्त्रों के प्रयोग से वे अपने उत्पादन को बढ़ाने में सफल हो गए। उनका जीवन स्तर भारतीय किसान की तुलना में बहुत ऊँचा है। भारतीय किसान जहाँ घोर दरिद्रता का जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी किसान जीवन की सुविधाओं का भोग कर रहे हैं। छोटे-छोटे खेतों, पानी के अभाव, धन की कमी और अशिक्षा के कारण भारतीय किसान का जीवन स्तर आज भी वही है जो 50 वर्ष पहले था, यद्यपि सरकार उनकी स्थति में  सुधार के लिए प्रयत्नशील है, परन्तु अभी मंजिल बहुत दूर है।